प्रदीप भंडारी ने प्रस्तुत किया जन की बात का एग्जिट पोल।

प्रदीप भंडारी ने प्रस्तुत किया झारखंड का एग्जिट पोल।

प्रदीप भंडारी ने प्रस्तुत किया जन की बात का एग्जिट पोल।

नितेश दूबे , जन की बात

जन की बात के फाउंडर एंड सीईओ प्रदीप भंडारी ने झारखंड का एग्जिट पोल रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क पर प्रस्तुत किया।
एग्जिट पोल में प्रदीप भंडारी ने बताया कि जेएमएम कांग्रेस एलाइंस एज पर है वहीं बीजेपी दूसरे नंबर पर आ सकती है।
वहीं अगर मुख्यमंत्री पद की पसंद की बात की जाए तो हेमंत सोरेन वर्तमान सीएम रघुवर दास से कहीं आगे हैं। जानकारी के लिए आपको बता दें कि झारखंड में कुल 81 विधानसभा सीटें हैं।

बीजेपी की जा सकती सरकार

जन की बात के एग्जिट पोल के मुताबिक झारखंड में बीजेपी कि सरकार जा सकती हैं। एग्जिट पोल के मुताबिक बीजेपी को 22 से 30 सीटें मिलने की संभावना है। वहीं पर कांग्रेस,जेएमएम और आरजेडी गठबन्धन को 37 से 46 सीटें मिलने की संभावना है। विधानसभा चुनाव से पूर्व बीजेपी गठबन्धन से अलग होने वाली आजसू को 3-5 सीटें मिलने की संभावना है। बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा को भी 3 से 4 सीटें मिलने की संभावना है। अन्य के खाते में 5 से 7 सीटें जा सकती हैं।

हेमंत सोरेन बन सकते मुख्यमंत्री

जन की बात के एग्जिट पोल के मुताबिक अगर नतीजे आते हैं तो हेमंत सोरेन झारखंड के अगले मुख्यमंत्री बनेंगे। बीजेपी 22-30 सीटों में सिमट जाएगी तो वहीं पर जेएमएम को अकेले 23 से 28 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस को 10 से 15 सीटें मिल सकती हैं वहीं पर आरजेडी को 3 से 4 सीटें मिल सकती हैं। बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा को भी 3 से 4 सीटें मिलने की संभावना है।

एनसीपी को 1 सीट मिल सकती हैं वहीं एमसीसी को 1 से 2 सीट मिल सकती है। सीपीआई एमएल को 0-1, आजसू को 3 से 5 और अन्य को 3 सीटें मिल सकती हैं।

एग्जिट पोल की मुख्य बातें

एग्जिट पोल की मुख्य बात यह है कि आदिवासी क्षेत्रों में जेएमएम की काफी मजबूत पकड़ है और हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री पद की पहली पसंद बने हुए हैं।

महिलाओं का रुझान एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी की तरफ है तो वहीं ओबीसी वोटर्स में आजसू ने भी अच्छी सेंध लगाई है जिससे बीजेपी को नुकसान हुआ है।

एग्जिट पोल में रघुवर दास खुद अपनी सीट पर एज पर हैं तो वहीं आजसू के अध्यक्ष सुदेश मेहतो पिछले 2 चुनाव हारने के बाद इस बार जीत सकते हैं।

सीएनपीटी कानून में संशोधन के बाद आदिवासी समाज भी मुख्यमंत्री से काफी नाराज हो गया जिसका खामियाजा बीजेपी को चुनाव में भुगतना पड़ेगा।