60% को लगता है नही चलेगा महागठबंधन

60% को लगता है नही चलेगा महागठबंधन

 

2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों की तैयारी देश की सभी बड़ी-छोटी पार्टियों ने काफी पहले से ही शुरू कर दी है कोई अपने रूठे साथी को मना रहा है तो कोई नये गठबंधन को बांधने की कोशिश कर रहा है। इस सब के बीच अगर कुछ प्रचलित है तो वह कांग्रेस का महागठबंधन है क्योकि इस महागंठधन में देश की लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियॉं जो पहले एक दूसरे के समक्ष तक नही खड़ी होती थी आज हाथों में हाथ डाल कर फोटो खिंचवा रही है। समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, तेलगू देसम पार्टी जैसी पार्टियॉं जो अभी कुछ समय पहले तक एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए कोई कसर नही छोड़ती थी आज वो सत्ता के लालच में साथ आकर 2019 के लोकसभा चुनाव लड़ेंगी। कांग्रेस के महागठबंधन के बारे में जो सबसे बड़ी बात कही जा रही है वो ये है कि महागठबंधन नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी को कुछ राज्यों में अच्छी टक्कर दे सकता है और अगर ये महागठबंधन किसी तरह से जीत कर केन्द्र सरकार बना भी लेता है तो ज्यादा दिन तक इस सरकार का सत्ता में रह पाना मुश्किल होगा है।

 

 

 

जन की बात फाउंडर सीईओ प्रदीप भंडारी ने इस महागठबंधन पर जब जनता की राय जन चौपाल के जरिए जानी तो वो कुछ ऐसी निकली- चौपाल में मौजूद 60 प्रतिशत लोगो को लगता है कि ये महागठबंधन सत्ता में आकर अपना कार्यकाल पूरा नही कर सकता है और ना ही इस महागठबंधन द्वारा जनता के विकास की अपेक्षा रखी जा सकती है। हालांकि चौपाल में मौजूद बाकि की 40 प्रतिशत जनता को ऐसा लगता है कि महागठबंधन देश को उन्नती की ओर लेकर जा सकता है और अपना कार्यकाल पूरे 5 साल तक चलाएगा।

जनता के बीच हुई जन चौपाल में सभी ने महागठबंधन को समर्थन देने और ना देने की वजहों को साफ-साफ इस चौपाल में कहा। दरअसल, महागठबंधन को समर्थन देने वालों में कुछ ऐसे लोग थे जो कांग्रेस या किसी क्षेत्रीय पार्टी के पुराने समर्थक थे लेकिन इन्ही में कुछ ऐसे भी थे जो पहले भारतीय जनता पार्टी के समर्थक हुआ करते थे लेकिन जीएसटी और नोटबंदी के चलते आहत है और अब भाजपा को वोट नही करना चाहते है।