2019 चुनाव का सटीक आंकलन कर जन की बात ने रचा इतिहास

jan ki baat exit poll 2019

2019 चुनाव का सटीक आंकलन कर जन की बात ने रचा इतिहास

लोकसभा चुनाव को लेकर रिपब्लिक भारत और जन की बात ने जमीन पर उतर कर हकीकत पता लगाने की कोशिश की. इस सर्वे में जन की बात टीम और संस्थापक प्रदीप भंडारी ने 1 फरवरी से लेकर 19 मई तक एक-एक लोकसभा सीट पर घूम कर वहां की ज़मीन समझने की कोशिश की. इसी का परिणाम रहा कि जब कोई भी यह मानने को तैयार नहीं था कि भारतीय जनता पार्टी वापसी कर रही है, उस समय जन की बात टीम ने यह संभावना जताई थी कि नरेंद्र मोदी अच्छे बहुमत के साथ वापसी करेंगे.

इस टीम ने लगभग 8 लाख लोगों से बात करते हुए सटीक आंकड़ा खोज निकाला. इस सर्वे में रिपब्लिक भारत और जन की बात ने मोदी सरकार की लहर को पहले ही भांप लिया था. भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दल मिलकर लगभग 300 से अधिक सीटें जीत रहे हैं, इस बात का आंकलन प्रदीप भंडारी जी ने अप्रैल महीने में ही कर लिया था. उन्होंने अप्रैल में ही कहा था कि जमीन पर मिले आंकड़ों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता अभी भी बरकरार है.

उत्तर प्रदेश की जटिल राजनीति का आसान तरीके से आंकलन

जन की बात की टीम इकलौती ऐसी टीम थी जिन्होंने पहले ही बोल दिया था कि यूपी में कास्ट फैक्टर काम नहीं करेगा और यहां पर चुनाव मोदी और एंटी मोदी के बीच में होगा. जहां दूसरी तरफ अन्य लोग इस बात की संभावना लगा रहे थे कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का वोट एक दूसरे में मिल जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इस तथ्य की भी पुष्टि सबसे पहले जन की बात ने की. इसीलिए जन की बात ने अप्रैल में ही यह कह दिया था कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी 50 से अधिक सीटें जीतेगी. एक तरफ सभी राजनीतिक विश्लेषक उत्तर प्रदेश को भारतीय जनता पार्टी के लिए बहुत कठिन मान रहे थे. वही प्रदीप भंडारी जी ने अपनी टीम की मदद से देश के सामने यह बता दिया था कि यह चुनाव नरेंद्र मोदी का चुनाव है. लोग जात-पात से हटकर मोदी की विचारधारा और पसंद के आधार पर वोट करेंगे.

पश्चिम बंगाल में ममता के किले में लगेगी सेंध: जन की बात

सबसे कठिन माने  जाने वाले  राजनितिक समीकरणों को, राजनितिक हिंसा के लिए खबरों में रहने वाले पश्चिम बंगाल से जन की बात ने चुनाव से कई हफ्तों पहले, लोगो की नब्ज़ टटोल कर देश के सामने ऐसे नंबर रखे,  जिन्होंने उस समय सभीको चौकाया था, लेकिन आख़िरी में सबने जन की बात के उस नंबर की सराहना की। लोकसभा चुनाव 2019 में भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में भी मजबूती से नजर आ रही थी, जिसकी पड़ताल सबसे पहले जन की बात टीम और प्रदीप भंडारी ने की. प्रदेश के अंदर तृणमूल कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी के लिए लोगों में अलग तरीके का विश्वास था. इसके साथ ही डर भी था, जिसके कारण लोग खुलकर बोल नहीं रहे थे, लेकिन जन की बात ने गांव-गांव और एक-एक कोने में घूमकर लोगों की इच्छा जानने की कोशिश की, इसी का परिणाम रहा कि बंगाल में भी जन की बात की टीम ने बिल्कुल सटीक आंकलन किया.

जन की बात के संस्थापक श्री प्रदीप भंडारी ने 400 से अधिक लोकसभा क्षेत्रों में घूमकर देश का मूड जानने की कोशिश की. उनके साथ 35 लोगों की टीम है, जिसमें 20 से 30 साल के युवा जुड़े हुए हैं. इस युवा टीम के जोश और जुनून के दम पर जन की बात आज नया कीर्तिमान रच रही है.

लोकसभा चुनाव 2019 ही नहीं इसके पहले भी जन की बात ने अपनी काबिलीयत का लोहा मनवाया है. धीरे-धीरे जान की बात एक विश्वासपात्र नाम बनता जा रहा है. जिस पर लोग विश्वास करते हैं और जन की बात के आंकड़े का इंतजार करते रहते हैं. चुनाव को समझना और उसका आंकलन करना, अपने आप में कठिन कार्य है. लेकिन प्रदीप भंडारी और उनकी टीम का काम करने का तरीका इस कठिन काम को भी आसान बना देता है. आसान बनाने के साथ-साथ सही आंकलन और सटीकता इस टीम की आदत बन गई है. इसका दिलचस्प और सबसे जीता जागता उदाहरण है, लोकसभा चुनाव 2019 है. जहां रिजल्ट आने के 2 महीने पहले ही प्रदीप भंडारी ने यह बता दिया था कि भारतीय जनता पार्टी 300 से अधिक सीटें जीतने वाली है. उस समय यह आंकड़ा सुनकर कई लोगों ने विरोध भी जताया था. लेकिन जमीन से जुड़े रहकर काम करना और सही आंकलन करना इस टीम को ऐसे लोगों से लड़ने की क्षमता देता है.

हर पहलू पर होती है नजर

जन की बात की टीम हर दिन लगभग 8000 लोगों से बात करती थी और उनकी कोशिश आम वोटर के मन की बात को समझने की रहती है. इसके साथ ही जन की बात की टीम हर एक पहलू पर विचार करती है, जैसे क्षेत्र का जातिगत समीकरण, उम्मीदवारों का इतिहास, पार्टियों की मजबूती और राजनीतिक मुद्दे इन्हीं सब के सही आंकलन के बाद सटीक रिजल्ट मिलता है. जन की बात का अगला लक्ष्य अपने इस चुनावी आंकलन के कार्यक्रम को एक बड़े स्तर पर पहुंचाना है. इसके साथ ही जमीनी तौर पर लोगों से बातचीत का यह सिलसिला सुनियोजित तरीके से चलता रहेगा. जन की बात के संस्थापक प्रदीप भंडारी ने बताया कि वह जन की बात को विश्व स्तर पर ले जाना चाहते हैं. उनका मानना है जब तक आप लोगों से मिलते नहीं हैं, तब तक आपको सही असलियत का पता नहीं चलता. इसीलिए लोगों से मिलते रहे और करते रहे ‘जन की बात लोगों के साथ’.